Faizabad Lok Sabha: अयोध्या में भाजपा की जिस हार के सबसे ज्यादा चर्चे, वहां का सियासी इतिहास और समीकरण कैसा?

Faizabad Lok Sabha Result 2024: 1957 में देश के दूसरे आम चुनाव हुए तब फैजाबाद नाम से लोकसभा सीट अस्तित्व में आई। 2024 में फैजाबाद सीट पर सपा के अवधेश प्रसाद ने जीत दर्ज की है। अयोध्या जिले की इस सीट पर भाजपा की हार की बहुत चर्चा हो रही है।

Faizabad lok sabha Seat result 2024 Profile And History in ayodhya

लोकसभा चुनाव 2024 का जनादेश सुनाया जा चुका है। 18वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव के नतीजे मंगलवार को घोषित कर दिए गए। इस चुनाव में केंद्र की सत्ताधारी भाजपा को उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में बड़ा झटका लगा है। यूपी में सीटें कम हुईं तो पार्टी इस बार बहुमत के आंकड़े से भी दूर रह गई। अयोध्या जिले की फैजाबाद लोकसभा सीट पर भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। रामनगरी में विपक्षी गठबंधन के प्रत्याशी व सपा नेता अवधेश प्रसाद कड़े मुकाबले में करीब 54 हजार मतों से जीत गए।  

फैजाबाद लोकसभा सीट पर भाजपा की हार से तमाम सवाल उठ रहे हैं। राम मंदिर बनने के बाद यहां पहला लोकसभा चुनाव हुआ और उसमें भाजपा को असफलता मिली। इन तमाम सवालों के बीच हमारी खास पेशकश ‘सीट का समीकरण’ में आज इसी फैजाबाद सीट की बात करेंगे। इसके चुनावी इतिहास की बात करेंगे। बात करेंगे यहां से जीते उम्मीदवारों की, पिछले चुनाव में इस सीट पर क्या हुआ था? इस बार कैसे समीकरण बने? ये भी जानेंगे…

पहले फैजाबाद सीट के बारे में 
उत्तर प्रदेश से लोकसभा के 80 सांसद चुने आते हैं। इन 80 लोकसभा सीटों में से एक फैजाबाद भी है। इस चुनाव में फैजाबाद सीट सुर्खियों में है। साल 1951-52 में देश के पहले आम चुनाव हुए तब फैजाबाद नाम से लोकसभा सीट नहीं थी। जब देश के दूसरे आम चुनाव हुए तब फैजाबाद नाम से लोकसभा सीट अस्तित्व में आई। फैजाबाद लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में पांच विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। ये विधानसभा क्षेत्र हैं दरियाबाद, रुदौली, मिल्कीपुर (एससी), बीकापुर और अयोध्या। मिल्कीपुर (एससी) सीट छोड़ दें तो बाकी चारों सीटों पर भाजपा के विधायक हैं। दिलचस्प है कि फैजाबाद लोकसभा सीट के अंतर्गत सपा के एकलौते विधायक अब फैजाबाद के सांसद होंगे। फिलहाल मिल्कीपुर से सपा के अवधेश प्रसाद विधायक हैं। 

शुरुआत में फैजाबाद में कांग्रेस जीती
1957 के चुनाव में फैजाबाद सीट पर कांग्रेस को जीत मिली। यहां पार्टी के दो उम्मीदवार पन्ना लाल और राजा राम को सफलता मिली। बता दें कि पहले दो आम चुनावों यानी 1952 और 1957 में कुछ सीटों पर दो-दो सांसद चुने गए थे। इनमें एक सामान्य श्रेणी से और एक अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से होते थे। यह व्यवस्था 1961 में एक कानून के जरिए खत्म की गई।

962 में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के बृज बासी लाल को जीत मिली। उन्होंने जन संघ के राजेंद्र बहादुर सिंह को 10,852 वोट से हरा दिया। 1967 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस के राम कृष्णा सिन्हा जीते। उन्होंने भारतीय जन संघ के सीबी अग्रवाल को 16,909 वोट से हराया था।

1971 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस के राम कृष्णा सिन्हा ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में उन्होंने इंडियन नेशनल कांग्रेस (ऑर्गनाइजेशन) की टिकट पर उतरीं सुचेता कृपलानी को 77,690 वोटों से हरा दिया। ये वही सुचेता कृपलानी थीं जिन्हें भारत की प्रथम महिला मुख्यमंत्री होने का गौरव हासिल है। स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनीतिज्ञ सुचेता कृपलानी 1963 से 1967 के बीच उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं। 

आपातकाल के बाद कांग्रेस को हार झेलनी पड़ी
साल 1977, आपातकाल के बाद देश में चुनाव होते हैं। देश के ज्यादातर हिस्सों में कांग्रेस को हार झेलनी पड़ी जिसमें फैजाबाद की असफलता भी शामिल थी। यहां भारतीय लोकदल के टिकट पर मैदान में उतरे अनंत राम जायसवाल ने जीत दर्ज की। जायसवाल ने कांग्रेस उम्मीदवार राम कृष्णा सिन्हा को 1,47,803 मतों से शिकस्त दी। 

तीन साल बाद यानी 1980 में देश में मध्यावधि चुनाव हुए। इस बार इंडियन नेशनल कांग्रेस (आई) ने सफलता का स्वाद चखा। पार्टी के प्रत्याशी जय राम वर्मा ने जनता पार्टी (सेकुलर) के अनंत राम जायसवाल को 54,416 वोटों से हराया। 

1984 के लोकसभा चुनाव में फैजाबाद से कांग्रेस को सफलता मिली। सहानुभूति लहर पर सवार होकर कांग्रेस सत्ता में आई, जिसमें फैजाबाद में मिली जीत भी शामिल थी। यहां कांग्रेस के प्रत्याशी निर्मल खत्री ने भाकपा के टिकट पर उतरे मित्र सेन को 1,04,492 वोटों से शिकस्त दी।

1989 के चुनाव में फैजाबाद में भाकपा के मित्र सेन ने अपनी पिछली हार का बदला ले लिया। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी निर्मल खत्री को एक करीबी मुकाबले में 5,855 मतों से हरा दिया। 

राम मंदिर आंदोलन के बाद भाजपा ने खोला अपना खाता
मंदिर आंदोलन के बाद भाजपा को पहली बार अयोध्या सीट पर जीत मिली। 1991 के चुनाव में राम मंदिर आंदोलन के बड़े चेहरों में शामिल रहे विनय कटियार यहां से जीतने में सफल रहे थे। कटियार 1996 में भी यहां से भाजपा के टिकट पर जीतकर सांसद बने।

1998 में अयोध्या सीट पर समाजवादी पार्टी को पहली बार जीत मिली। इस बार उन्हें मित्रसेन यादव ने यहां से जीत दिलाई। मित्रसेन इससे पहले 1989 में भाकपा के टिकट पर सांसद रह चुके थे। 1999 में एक बार फिर फैजाबाद सीट पर भाजपा ने जीत दर्ज की। इस बार भी यह जीत विनय कटियार ने ही दिलाई। 

1999 के बाद 2004 में एक बार फिर यहां से मित्रसेन यादव ने जीत दर्ज की। इस बार मित्रसेन बसपा के टिकट पर यहां से उतरे थे। इस चुनाव में भाजपा ने कटियार की जगह लल्लू सिंह को टिकट दिया था। 

2009 में फैजाबाद सीट पर कांग्रेस के निर्मल खत्री जीतने में सफल रहे थे। खत्री इससे पहले 1984 में भी फैजाबाद सीट से जीत दर्ज कर चुके थे। खत्री के खिलाफ भाजपा ने यहां से लल्लू सिंह तो सपा ने मित्रसेन यादव को टिकट दिया था। 

2014 और 2019 में भाजपा के लल्लू सिंह को मिली जीत

  • 2014 में फैजाबाद लोकसभा सीट पर भाजपा ने वापसी की। लगातार दो चुनाव हारने वाले लल्लू सिंह इस बार जीतने में सफल रहे। उन्होंने मित्रसेन यादव को हरा दिया। 
  • 2019 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर लल्लू सिंह जीतने में सफल रहे। इस बार उन्होंने मित्रसेन यादव के बेटे आनंद सेन यादव को हराया, जो सपा के उम्मीदवार थे। 
  • 2022 के विधानसभा चुनाव में फैजाबाद लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली पांच में से चार विधानसभा सीटों दरियाबाद, रुदौली, अयोध्या और बीकापुर में भाजपा को जीत मिली थी। वहीं, मिल्कीपुर सुरक्षित सीट से सपा के अवधेश प्रसाद जीते थे। पासी समाज से आने वाले अवधेश प्रसाद अब अयोध्या के सांसद बन गए हैं।
  • अबकी बार सपा ने मारी बाजी
  • 2024 के लोकसभा चुनाव में फैजाबाद सीट पर सपा के अवधेश प्रसाद 54,567 वोट से जीत दर्ज की है। अवधेश प्रसाद को 5,54,289  वोट मिले। वहीं, भाजपा के लल्लू सिंह को 4,99,722 वोट मिले। 
  • विधानसभावार देखें तो फैजाबाद लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली पांच विधानसभा सीटों में से चार सीटों पर सपा के अवधेश प्रसाद ने बढ़त बनाई। भाजपा के लल्लू सिंह केवल अयोध्या सीट पर बढ़त बना सके।

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