UP: शहरी क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था को आसान बनाएंगी 1225 एसी ई बसें, बैठक में खरीद को दी मंजूरी

नगरीय परिवहन निधि नियमावली 2013 के तहत गठित निधि प्रबंधन समिति की 16वीं बैठक में नगरीय परिवहन व्यवस्था को सुदृढ बनाने से संबंधित कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। 16 नगर निगमों के तहत 272 चिह्नित पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों का भी विकास कराया जाएगा।
 

UP: 1225 AC e-buses will simplify the transport system in urban areas, purchase approved in the meeting

प्रतीकात्मक तस्वीर। 

शहरी क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने 1225 नई वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें खरीदने का फैसला किया है। साथ ही 16 नगर निगम वाले शहरों में पब्लिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने और 15 शहरों में पहले से संचालिच इलेक्ट्रिक बसों के लिए कार्बन क्रेडिट प्रोजेक्ट लागू करने का भी फैसला किया गया है।

मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई उप्र समर्पित नगरीय परिवहन निधि नियमावली 2013 के तहत गठित निधि प्रबंधन समिति की 16वीं बैठक में नगरीय परिवहन व्यवस्था को सुदृढ बनाने से संबंधित कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बसों की खरीद के लिए प्रमुख सचिव नगर विकास को अधिकृत किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार नई ई बसें वर्तमान में संचालित 1140 डीजल एवं सीएनजी बसों के स्थान पर क्रय की जाएंगी।

बसों का आवंटन शहरों में नगरीय परिवहन की जरूरत को देखते हुए किया जाएगा। वाराणसी में ई-बसों की चार्जिंग क्षमता बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि 15 शहरों में संचालित इलेक्ट्रिक बसों के लिए कार्बन क्रेडिट प्रोजेक्ट लागू किया जाएगा। इसके लिए कंसल्टेंट के चयन के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति दी गई।

इस परियोजना से उत्सर्जन में कमी का अध्ययन कर कार्बन क्रेडिट का विक्रय किया जाएगा। कार्बन क्रेडिट से होने वाली आय में न्यूनतम शेयर के आधार पर कंसल्टेंट का चयन किया जाएगा तथा इस परियोजना पर निदेशालय पर किसी प्रकार का वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। 16 नगर निगमों में पब्लिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी प्रदान की गई। इससे संबंधित प्रस्ताव के अनुसार 16 नगर निगमों के तहत 272 चिह्नित पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों का विकास कराया जाएगा।

यूपी में भवन निर्माण व भू उपयोग बदलने की प्रक्रिया होगी सरल

प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए भवन निर्माण व भू उपयोग बदलने की प्रक्रिया को सरकार ने और सरल और पारदर्शी बनाने का फैसला किया है। इसके लिए पुरानी नीतियों व नियमों के चलते आ रही बाधा को दूर किया जाएगा। प्रमुख सचिव आवास पी गुरु प्रसाद ने इस संबंध के सचिव आवास की अध्यक्षता में समिति का गठन किया है जो सुधार के संबंध में एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।

प्रमुख सचिव ने चार सदस्यीय समिति बनाई है। इसमें सचिव आवास अध्यक्ष, मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक सदस्य संयोजक, उपाध्यक्ष लखनऊ, गाजियाबाद व वाराणसी विकास प्राधिकरण और निदेशक आवास बंधु सदस्य बनाए गए हैं। समिति एक सप्ताह में इन नीतियों का अध्ययन करते हुए रिपोर्ट एक सप्ताह में शासन को उपलब्ध कराएगी। इसके आधार पर जरूरत पर नीतियों में संशोधन किया जाएगा।

उन्होंने इस संबंध में मंगलवार को शासनादेश जारी कर दिया। बता दें ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधारों को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय कैबिनेट सचिव की ओर से जारी अखिल भारतीय रैंकिंग में यूपी को पहला स्थान मिला है। अब कंप्लायंस रिडक्शन एंड डी रेगुलेशन फेज-2 लागू होना है। इसके मुताबिक राज्यों को ऐसी व्यवस्था देनी है जिससे लोगों का जीवन सरल हो और व्यापार उद्योग बढ़े।

दूसरे चरण में भूमि, भवन और निर्माण, ऊर्जा, बिजली, श्रम, फायर, पर्यावरण, पर्यटन, स्वास्थ्य सेवा व शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सुधार के लिए नियमों में ढील दिया जाना है। आवास विभाग को भवन निर्माण के साथ भू-उपयोग बदलने की नीतियों की प्रक्रिया को सरल करना है। केंद्र सरकार ने इसे दो माह में लागू करने के लिए कहा है।

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