
सोनिक (उन्नाव)। लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट पर पुलिस के हत्थे चढ़े बांग्लादेशी युवक के तार उन्नाव से जुड़े हैं। उसके पास दही थाना क्षेत्र के गढ़ी गांव के पते पर वर्ष 2018 का बना आधारकार्ड मिला है। लखनऊ से एसपी के पास फोन आते ही एलआईयू, इंटेलीजेंस ब्यूरो और पुलिस सक्रिय हो गई। पुलिस ने गढ़ी गांव के पूर्व प्रधान को पूछताछ के लिए उठाया है। कोटेदार से भी जानकारी ली गई है। जांच में पता चला कि युवक दही क्षेत्र के एक स्लाटर हाउस में काम करता था और गढ़ी गांव में किराए के घर में रहता था।
लखनऊ स्थित एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन जांच में बांग्लादेशी मोहम्मद नसीम को पकड़ा गया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक वह पिछले महीने ही बांग्लादेश से लौटा था और मलेशिया भागने की फिराक में था। जांच में उसके पास से आधार कार्ड, तहसील का निवास प्रमाणपत्र और पैन कार्ड भी मिला है।
उन्नाव के गढ़ी गांव में किराए के घर में रहने का पता चलने लखनऊ से एसपी दीपक भूकर को जानकारी दी गई। एसपी के निर्देश पर दही थाना पुलिस के साथ एलआईयू, आईबी सक्रिय हुईं। टीम उस समय के ग्राम प्रधान नीरज यादव के घर पहुंची और जानकारी की। जवाबों से संतुष्ट न होने पर पुलिस उन्हें थाने लाकर पूछताछ कर रही है।
एलआईयू ने कोटेदार से भी जानकारी जुटाई लेकिन उस समय वह किसके घर में किराए पर रह रहा था, यह पता नहीं चला। पुलिस सूत्रों के मुताबिक नसीम का इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर साल 2019 में पासपोर्ट भी जारी हुआ है। सूत्रों के मुताबिक मो. नसीम साल 2015 में त्रिपुरा बॉर्डर से अवैध रूप से भारत में घुसा, और सीधे उन्नाव के गढ़ी इलाके में पहुंच गया। यहां स्लॉटर हाउस में काम करने लगा।
थानाध्यक्ष अवनीश कुमार सिंह ने बताया कि लखनऊ एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन जांच के दौरान पकड़ा गया है। उन्नाव से मामला जुड़ने पर जांच की जा रही है।
एक स्लॉटर हाउस के प्रेसिडेंट तनवीर ने बताया कि किसी ठेकेदार के अंडर में नसीम काम कर रहा हो तो मुझे जानकारी नहीं है। हर तीन माह में फैक्टरी श्रमिकों की जानकारी खुफिया विभाग को दी जाती है।–
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जांच के प्रमुख बिंदु
-कैसे बन गए फर्जी दस्तावेज।
-तहसील से क्या बिना जांच जारी हो गया निवास प्रमाणपत्र।
-पासपोर्ट जारी करने से पहले सत्यापन में मामला क्यों नहीं पकड़ा जा सका।
-उन्नाव में रहकर उस समय क्या कोई नेटवर्क ऑपरेट कर रहा था।
बांग्लादेशी मिलने से खुफिया एजेंसियों पर सवाल
बीघापुर और गंगाघाट कोतवाली क्षेत्र में भी मिल चुके हैं बांग्लादेशी
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। जिले में लगातार बांग्लादेशी मिलने से खुफिया एजेसियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। दही थानाक्षेत्र के स्लाटर हाउस में बांग्लादेशी युवक के काम करने का यह पहला मामला नहीं है। इसके पहले गंगाघाट और बीघापुर कोतवाली क्षेत्र में भी बांग्लादेशी मिल चुके हैं। यही नहीं बीघापुर क्षेत्र में मिले बांग्लादेशियों ने पकड़े जाने के बाद जमानत के लिए फर्जी अभिलेख तक लगाए हैं। इससे उनकी जमानत खारिज हुई है।
रायबरेली के थाना लालगंज के नवरंग का पुरवा निवासी मानू सोनी ने बीघापुर कोतवाली में 21 फरवरी 2025 को रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें बताया कि सऊदी मुद्रा रियाल का लालच देकर महिला सहित दो युवकों ने उनसे 1.55 लाख ठग लिए। जांच में पुलिस ने मथुरा जिले के थाना लोहवन के रघुवीर बिहार कॉलोनी जमुना निवासी अब्दुल हुसैन, पश्चिम बंगाल के जिला उत्तर के थाना जीवनतला के काली कतला गांव निवासी मासूम मुल्ला, मथुरा के कोदवन गांव निवासी मिंटू, पत्नी हमीदा और मथुरा के रघुवीर बिहार कॉलोनी निवासी अफरोजा को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया था कि मिंटू और उसकी पत्नी हमीदा बांग्लादेश के रहने वाले हैं। हमीदा ने जमानत के लिए दो अप्रैल को जिला जज न्यायालय में अर्जी दी थी। एसीजेएम तृतीय न्यायालय से जमानत मंजूर हुई लेकिन विवेचक सूरज सिंह ने सत्यापन किया तो जमानतदारों के अभिलेख फर्जी पाए थे।
वहीं गंगाघाट कोतवाली क्षेत्र के मनोहर नगर में भी विदेशी नागरिकों के फर्जी आधार कार्ड और अन्य प्रपत्र बनवाने में सहयोग करने वाले पूर्व सभासद शहजादे को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। पुलिस ने जांच में पाया कि मोहल्ले में रहने वाले मो. साहिल उसकी पत्नी अजीदा, भाई अनवर, पत्नी नूरकायदा, हवीबुल्ला और असमत, उनकी मां रोहिमा, पिता याहियां, जुनैद, उसकी पत्नी सिनवारा बेगम सभी मो. सिद्दरफारा मोगंडो सिटी जिला बुसीडोंग म्यामांर के रहने वाले हैं। इन सभी के बच्चे भी मिले थे।
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पहले भी पकड़े गए हैं घुसपैठिया और आतंकी
-जुलाई 2023 में यूपी एटीएस ने बिहार के स्लाटर हाउस से रिजवान खान नाम के आतंकी को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में पता चला था कि वह वर्ष 2023 के फरवरी और मार्च महीने में दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र स्थित स्लाटर हाउस में काम कर चुका था। फैक्टरी ने जिस सिक्योरिटी एजेंसी से बीस सुरक्षा कर्मी लिए थे उनमें रिजवान भी था। दो महीने बाद कंपनी ने उसे बिहार भेज दिया था।
-मार्च 2021 में एटीएस ने मोहल्ला अनवार नगर में रहने वाले मानव तस्करी में लिप्त रोहिग्या शाहिद को गिरफ्तार किया था। उसने आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाता, एटीएम और पासपोर्ट बनवा लिया था। उसने 2010 में अलीगढ़ से अपना वोटर आईडी कार्ड भी बनवा लिया था।
-मार्च 2017 में भोपाल में ट्रेन में हुए विस्फोट के बाद एटीएस ने लखनऊ के ठाकुरगंज में आतंकी सैफुल्ला को इनकाउंटर में मार गिराया था। एनआईए (नेशनल इनवेस्टीगेशन एजेंसी) के हत्थे चढ़े कानपुर के गौस मोहम्मद और फैसल को लेकर एनआईए एसपी दीपक कुमार 28 मार्च 2017 को शहर आई थी। जांच में पता चला कि आतंकी सैफुल्ला और उसके साथी शहर की दरगाहों में जायरीन बनकर कई-कई दिन रुकते थे। इनमें रेलवे स्टेशन के पास स्थित बुद्धनशाह और किला मोहल्ला स्थित मस्जिद उनकी सबसे पसंदीदा थी।
-फरवरी 2018 में दही चौकी स्थित एक स्लाटर हाउस में काम कर रहे रोहिंग्या मुसलमानों को एटीएस ने पकड़ा था।
-मार्च 2017 को लखनऊ में एटीएस के एनकाउंटर में मारा गया आतंकी सैफुल्ला साथियों के साथ स्टेशन रोड व किला स्थिज मस्जिद में जरायीन के रूप में महीनों रुका था।
-2008 में जौनपुर में विस्फोट की घटना में शामिल नूर आलम ने दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र में एक बंद फैक्ट्री के पीछे विस्फोटक छिपाकर रखा था। उन्नाव स्पेशल कोर्ट ने नूर आलम उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
-फरवरी 2012 को दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम ने सात महीने से बांगरऊ के मदारनगर स्थित एक मदरसे में मौलवी बनकर रह रहे बशीर हसन नाम के एक युवक को गिरफ्तार किया था।