इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बृजभूषण, राजा भैया, धनंजय और अब्बास को कैसे मिला शस्त्र लाइसेंस कैसे मिला? HC ने की बाहुबलियों की आपराधिक कुंडली तलब की है। इसके साथ ही सरकारी सुरक्षा की जानकारी भी मांगी है। हाईकोर्ट ने सरकार से बाहुबलियों का ब्योरा मांगा है।

प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया कि सूबे में 10 लाख से ज्यादा शस्त्र लाइसेंसधारी हैं, जिसमें 6062 लोग दागी हैं। इससे हैरान कोर्ट ने उन बाहुबलियों की आपराधिक कुंडली और उन्हें मिली सरकारी सुरक्षा का ब्योरा तलब किया है, जिनका नाम सरकारी हलफनामे में गुम है। इनमें अब्बास अंसारी, बृजभूषण सिंह, राजा भैया समेत कई लोग हैं।
यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने संतकबीर नगर निवासी जय शंकर की याचिका पर दिया है। इससे पहले गन कल्चर से चिंतित कोर्ट ने प्रदेश में शस्त्र लाइसेंस के आवंटन, नवीनीकरण और नियमों की अनदेखी को लेकर मंडलवार जारी शस्त्र लाइसेंस की जानकारी मांगी थी।
कोर्ट ने लखनऊ जोन और लखनऊ कमिश्नरेट के इन लोगों की मांगी कुंडली
खान मुबारक, अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिपाही, संजय सिंह सिंघाला, अतुल वर्मा, मोहम्मद साहिब, सुधाकर सिंह, गुड्डू सिंह, अनूप सिंह, लल्लू यादव, बच्चू यादव, जुगनू वालिया उर्फ हरविंदर।
इन प्रभावशाली व्यक्तियों के लाइसेंसों की जांच के आदेश
रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया), धनंजय सिंह, सुशील सिंह, बृजभूषण शरण सिंह, विनीत सिंह, अजय मरहाद, सुजीत सिंह बेलवा, उपेंद्र सिंह गुड्डू, उदय भान सिंह समेत कई के शस्त्र लाइसेंस की जांच के आदेश दिए गए हैं।विज्ञापन
लाइसेंसी शस्त्रों की तैयार की खेप…ताकि कायम रहे दबदबा और दहशत
प्रदेश के कई बाहुबली, उनके करीबी-रिश्तेदार और कुछ माफिया ने लाइसेंसी शस्त्रों की खेप ले रखी है। ये सिर्फ इसलिए जिससे उनका दबदबा कायम रहे और उनकी दहशत रहे। इसको वह अपने मान सम्मान से भी जोड़ते हैं।
जान का खतरा बताकर तमाम आपराधिक मामले दर्ज होने के बावजूद एक व उससे अधिक लाइसेंसी शस्त्र ले रखे हैं। दरअसल हाईकोर्ट ने अब्बास अंसारी, बृजभूषण सिंह और राजा भइया समेत कई की आपराधिक कुंडली तलब की है।
सरकार की तरफ से दाखिल किए गए हलफनामे में बताया गया है कि प्रदेश में 10 लाख से अधिक शस्त्र लाइसेंस हैं, इसमें से 6062 दागी हैं। मतलब इन पर आपराधिक केस दर्ज हैं। इसके बावजूद उनको लाइसेंस मिले हैं।
कोर्ट की चेतावनी
कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है। कहा है कि सभी जिलों के कप्तान और पुलिस कमिश्नर जानकारी पेश करते वक्त यह लिखित अंडरटेकिंग देंगे कि कोई भी जानकारी छिपाई नहीं गई है। यदि कोई तथ्य छिपाया गया तो संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। इसे कर्तव्य के प्रति जानबूझकर की गई लापरवाही माना जाएगा।
हथियारों के प्रदर्शन से आत्मरक्षा नहीं, भय झलकता है: हाईकोर्ट
कोर्ट ने कहा कि हथियारों का सार्वजनिक प्रदर्शन भले ही दबदबा, ताकत और सुरक्षा का भ्रम पैदा करता हो पर यह अक्सर सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ता है। आम जनता में भय व असुरक्षा की भावना पैदा करता है। खुलेआम हथियार लेकर चलना भले ही आत्मरक्षा के नाम पर सही ठहराया जाए, लेकिन जब ये डराने-धमकाने का जरिया बन जाते हैं तो इनसे सुरक्षा नहीं, बल्कि खौफ पैदा होता है। ऐसा समाज जहां हथियारबंद लोग बलपूर्वक अपना दबदबा कायम करते हैं, वह शांतिप्रिय नहीं हो सकता।